आज खामोश रहने का मन हैं
सोचता हूँ
थम जाए सब कुछ
और फ़ैल जाये सन्नाटा चारों तरफ
हवा से हिलते पत्ते
आपस में लड़ती गिलहरियां
बिजली से चलता पंखा
घड़ी की टिक टिक
पंछियों की चहचाहट
ये सब कुछ पल के लिए
स्थिर हो जाए
मुझे आज कुछ और सुनना हैं
कहीं सुना था
कि
अंतर्मन बात किया करता हैं
मुझे भी सुननी हैं
अपने अंतर्मन की आवाज
वो आवाज
जिसको दबा दिया जाता हैं अक्सर
जब जब उठती हैं ये आवाज
पैरों तले कुचल दिया जाता हैं
आज मैं तन्हा बैठ कर
सुनना चाहता हूँ
कि आखिर क्या कहता हैं
मेरा अंतर्मन मुझसे ??
कल्याण के विश्नोई
सोचता हूँ
थम जाए सब कुछ
और फ़ैल जाये सन्नाटा चारों तरफ
हवा से हिलते पत्ते
आपस में लड़ती गिलहरियां
बिजली से चलता पंखा
घड़ी की टिक टिक
पंछियों की चहचाहट
ये सब कुछ पल के लिए
स्थिर हो जाए
मुझे आज कुछ और सुनना हैं
कहीं सुना था
कि
अंतर्मन बात किया करता हैं
मुझे भी सुननी हैं
अपने अंतर्मन की आवाज
वो आवाज
जिसको दबा दिया जाता हैं अक्सर
जब जब उठती हैं ये आवाज
पैरों तले कुचल दिया जाता हैं
आज मैं तन्हा बैठ कर
सुनना चाहता हूँ
कि आखिर क्या कहता हैं
मेरा अंतर्मन मुझसे ??
कल्याण के विश्नोई

बढ़िया भाई,
ReplyDeleteThank you Sunil
DeleteNice words
ReplyDeleteThank you Sir
DeleteNice
ReplyDeleteThank you Madhur ji
DeleteThank you so much sir
ReplyDeleteBahut khoob Kalyan
ReplyDeleteBadhayi
Thank you Roshni
DeleteBahut khoob Kalyan
ReplyDeleteBadhayi
Very nice
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteआभार छगन जी 💐
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