माना रौशनी थोड़ी सी कम है
पलकों के कोने भी नम है
उम्मीदें मद्धम मद्धम है
और उदासी का आलम है
रुक ज़रा एक सांस तो ले ले
सोच कहाँ रहा कुछ कम है
तेरा मेरा साथ कुछ ऐसा है
नई कहानी बन जायेगी
रौशनी... फिरसे फैलेगी
पलकें फिरसे मुस्काएँगी
उम्मीदों के पुष्प खिलेंगे
और बहारें छा जाएँगी
कविता ही तो है
कहीं सुना था किसी भी चीज की मृत्यु उतनी तेज़ी से नहीं होती जितनी तेज़ी से बंद दिमाग में एक विचार मरता है तो अब मेरे विचार मरेंगे नहीं कविताएं बन के बाहर आएंगे.
Tuesday, 22 March 2016
वक़्त बदलेगा
Tuesday, 1 March 2016
अंतर्मन की आवाज
आज खामोश रहने का मन हैं
सोचता हूँ
थम जाए सब कुछ
और फ़ैल जाये सन्नाटा चारों तरफ
हवा से हिलते पत्ते
आपस में लड़ती गिलहरियां
बिजली से चलता पंखा
घड़ी की टिक टिक
पंछियों की चहचाहट
ये सब कुछ पल के लिए
स्थिर हो जाए
मुझे आज कुछ और सुनना हैं
कहीं सुना था
कि
अंतर्मन बात किया करता हैं
मुझे भी सुननी हैं
अपने अंतर्मन की आवाज
वो आवाज
जिसको दबा दिया जाता हैं अक्सर
जब जब उठती हैं ये आवाज
पैरों तले कुचल दिया जाता हैं
आज मैं तन्हा बैठ कर
सुनना चाहता हूँ
कि आखिर क्या कहता हैं
मेरा अंतर्मन मुझसे ??
कल्याण के विश्नोई
सोचता हूँ
थम जाए सब कुछ
और फ़ैल जाये सन्नाटा चारों तरफ
हवा से हिलते पत्ते
आपस में लड़ती गिलहरियां
बिजली से चलता पंखा
घड़ी की टिक टिक
पंछियों की चहचाहट
ये सब कुछ पल के लिए
स्थिर हो जाए
मुझे आज कुछ और सुनना हैं
कहीं सुना था
कि
अंतर्मन बात किया करता हैं
मुझे भी सुननी हैं
अपने अंतर्मन की आवाज
वो आवाज
जिसको दबा दिया जाता हैं अक्सर
जब जब उठती हैं ये आवाज
पैरों तले कुचल दिया जाता हैं
आज मैं तन्हा बैठ कर
सुनना चाहता हूँ
कि आखिर क्या कहता हैं
मेरा अंतर्मन मुझसे ??
कल्याण के विश्नोई
Monday, 29 February 2016
कविता ही तो है
खुली आँखों में ख्वाब सजाना
फिर उम्मीदों से दौड़ लगाना
कविता ही तो है
बेवजह का शोर मचाना
या भ्रमर सा गुनगुनाना
कविता ही तो है
किसी का यादों में आ जाना
या किसी को अपनी याद दिलाना
कविता ही तो है
अरमानो का पेड़ लगाना
कामयाबी का फल पा जाना
कविता ही तो है
आँखों में आंसू आ जाना
फिर भी मंद मंद मुस्काना
कविता हो तो है
नजरों से नजरें मिल जाना
और अदा से नजर झुकाना
कविता ही तो है
इन मेरे शब्दों को पढ़ते जाना
और मन में अपना कल दोहराना
कविता ही तो है।
कल्याण के विश्नोई
फिर उम्मीदों से दौड़ लगाना
कविता ही तो है
बेवजह का शोर मचाना
या भ्रमर सा गुनगुनाना
कविता ही तो है
किसी का यादों में आ जाना
या किसी को अपनी याद दिलाना
कविता ही तो है
अरमानो का पेड़ लगाना
कामयाबी का फल पा जाना
कविता ही तो है
आँखों में आंसू आ जाना
फिर भी मंद मंद मुस्काना
कविता हो तो है
नजरों से नजरें मिल जाना
और अदा से नजर झुकाना
कविता ही तो है
इन मेरे शब्दों को पढ़ते जाना
और मन में अपना कल दोहराना
कविता ही तो है।
कल्याण के विश्नोई
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