Monday, 29 February 2016

कविता ही तो है

खुली आँखों में ख्वाब सजाना
फिर उम्मीदों से दौड़ लगाना
कविता ही तो है
बेवजह का शोर मचाना
या भ्रमर सा गुनगुनाना
कविता ही तो है
किसी का यादों में आ जाना
या किसी को अपनी याद दिलाना
कविता ही तो है
अरमानो का पेड़ लगाना
कामयाबी का फल पा जाना
कविता ही तो है
आँखों में आंसू आ जाना
फिर भी मंद मंद मुस्काना
कविता हो तो है
नजरों से नजरें मिल जाना
और अदा से नजर झुकाना
कविता ही तो है
इन मेरे शब्दों को पढ़ते जाना
और मन में अपना कल दोहराना
कविता ही तो है।

कल्याण के विश्नोई