माना रौशनी थोड़ी सी कम है
पलकों के कोने भी नम है
उम्मीदें मद्धम मद्धम है
और उदासी का आलम है
रुक ज़रा एक सांस तो ले ले
सोच कहाँ रहा कुछ कम है
तेरा मेरा साथ कुछ ऐसा है
नई कहानी बन जायेगी
रौशनी... फिरसे फैलेगी
पलकें फिरसे मुस्काएँगी
उम्मीदों के पुष्प खिलेंगे
और बहारें छा जाएँगी
अच्छी आशावान कविता
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद सर 💐
DeleteNice
ReplyDeleteबहुत आभार छगन जी 💐
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